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निठारी कांड में बड़ा फैसला, रेप व हत्या में कोली-पंधेर को फांसी की सजा

नई दिल्ली (जेएनएन)। देश-दुनिया में चर्चित निठारी कांड के 8वें मामले में सोमवार को गाजियाबाद की विशेष सीबीआइ अदालत ने दोषी करार दिए गए सुरेंद्र कोली और मोनिदर सिह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई है। हालांकि, मोनिंदर सिंह को दूसरे मामले में यह सजा मिली है, जबकि कोली को आठवें मामले में सजा हुई।

सोमवार को सुनवाई के दौरान जज पवन कुमार तिवारी की अदालत में दोषियों को सजा को लेकर दोनों पक्षों में जमकर बहस हुई थी। बाद में जज ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' मानते हुए दोनों को फांसी की सजा दी है। 


यह थी घटना
सीबीआइ के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि नोएडा के निठारी गांव में रह रही पश्चिम बंगाल के बहरामपुर निवासी 20 वर्षीय युवती सेक्टर 37 में एक कोठी में घरेलू सहायिका थी।
वह रोजाना निठारी के डी-5 कोठी के सामने से गुजरती थी। पांच अक्टूबर 2006 को वह कोठी में काम करने गई थी। काम खत्म करने के बाद उसने दोपहर 1.30 बजे वहीं सीरियल कुमकुम देखा और फिर घर के लिए रवाना हुई, लेकिन घर नहीं पहुंची। पिता ने नोएडा के थाना सेक्टर-20 में गुमशुदगी की तहरीर दी थी।
पुलिस ने 30 दिसंबर 2006 को नोएडा के सेक्टर 20 थाने में हत्या का मामला दर्ज किया। दस जनवरी 2007 को केस सीबीआइ को ट्रांसफर किया गया।
इस मामले में सीबीआई ने 11 जनवरी 2007 को पंधेर व कोली के खिलाफ युवती के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद 11 अप्रैल 2007 को चार्जशीट पेश की।
सवा दस साल के मुकदमे की कार्रवाई में विशेष लोक अभियोजक ने 46 गवाहों को पेश कर बयान दर्ज कराए। वहीं, बचाव पक्ष की तरफ से तीन गवाह पेश किए गए। खास बात यह है कि सुनवाई के दौरान सुरेंद्र कोली ने 56 दिन स्वयं बहस की। उसने अपनी पैरवी करने वाले कई अधिवक्ताओं को हटा दिया था।
Source:-Jagran

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